कटहल की खेती से कमायें 20 लाख तक, ऐसे करें खेती

Kathal Ki Kheti (कटहल की खेती कैसे करें?): कटहल फार्मिंग एक ऐसी खेती है जिसकी डिमांड लगभग हर महीने में रहती है। इसलिए कटहल की फार्मिंग करके आप लाखों नहीं बल्कि करोड़ों का मुनाफ़ा कमा सकते हैं। कटहल की खेती दो तरीकों से की जाती है जिसमें एक तरीका पारंपरिक है तथा दूसरा तरीका वैज्ञानिक है। वैज्ञानिक तरीके से कटहल का पेड़ लगाकर आप उससे काफी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। हम आपको इस आर्टिकल में कटहल की खेती से सम्बंधित जानकारी देंगे तथा कैसे आप कटहल से मुनाफ़ा कमा सकते हैं ये भी बतायेंगे। तो अगर आप Jackfruit Farming Hindi की जानकारी जानने आये हो तो इस आर्टिकल के साथ बनें रहिये।

कटहल-की-खेती
कटहल की खेती

कटहल एक ऐसा फल है जिसकी सब्ज़ी पूरे भारत में बड़े चाव से खाई जाती है। हालांकि जो लोग नॉन वेज नहीं खाते हैं उनके लिए कटहल किसी वरदान से कम नहीं है। कटहल में विटामिन ए, शर्करा तथा अन्य पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जिसकी वजह से इसकी डिमांड साल के लगभग बारह महीनों रहती है। इसकी खेती काफी कम जगह ही की जाती है जिसके कारण बाज़ार में इसका स्टॉक काफी कम रहता है। इसलिए अगर आप कटहल की खेती करने की सोच रहे हैं तो ये एकदम अच्छा समय है क्योंकि अभी कटहल फार्मिंग में बिल्कुल भी कम्पटीशन नहीं है जिसकी वजह से आपको इसका अच्छा रेट मिल जाएगा।

कटहल की वैज्ञानिक खेती करने से पहले आपको ये पता होना जरूरी है कि कटहल का पेड़ कैसे लगाया जाता है। क्योंकि अगर आप कोई भी Farming करते हैं तो सबसे पहले आपको उसके बारे में अच्छी तरह से जानकारी होना आवश्यक है तभी आप उस फसल से एक अच्छा खासा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। हालांकि कटहल के पौधे की खेती में नुकसान तो नहीं होता है क्योंकि उसका एक ही फल करीब 10 से 20 किलो तक होता है तथा मार्किट में एक किलो कटहल की कीमत करीब 150 रुपये तक रहती है। इस तरह कटहल का एक फल आपको करीब 1500 से 3000 देता है। लेकिन इसकी खेती में रोगों का प्रभाव भी काफी रहता है तथा इसकी खेती करना आसान नहीं है। इसलिए आज हम आपको कटहल की खेती कैसे करें? (Jackfruit Farming Hindi) में इस खेती से जुड़ी हरेक जानकारी देंगे तो इस लेख को अंत तक ध्यान से जरूर पढ़ें।

कटहल (kathal Ki Kheti) के लिए जलवायुतापमान व भूमि का चुनाव

कटहल का पौधा काफी जटिल होता है जिसके कारण इसकी खेती पूरे भारत में कहीं भी की जा सकती है। लेकिन अगर आप वैज्ञानिक रूप से इसकी खेती करना चाहते हैं तो दोमट मिट्टी इस खेती के लिए बेहद उपजाऊ होती है। लेकिन जहां पर आप इसकी खेती करने वाले हो वहाँ पर पानी की निकासी अच्छी होनी चाहिए क्योंकि ज्यादा पानी की वजह से इसका पौधा व फल दोनों सड़ने लगते हैं।

कटहल फार्मिंग के लिए कोई उपयुक्त जलवायु नहीं है क्योंकि आप कहीं भी इसकी खेती कर सकते हैं। लेकिन अगर आप अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो गर्म जलवायु इसके लिए उत्तम मानी जाती है। Jackfruit Farming करते वक़्त एक बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि मिट्टी का PH 7 के आसपास होना चाहिए। इसके पौधे ज्यादा ठंड को भी सहन नहीं कर पाते हैं इसलिए इसके पौधे को पाले से बचाकर रखना चाहिए।

कटहल के लिए उपयुक्त तापमान 20 से 40 डिग्री तक होता है। इस तापमान में इसकी अच्छी खेती होती है तथा प्रोडक्शन भी भर-भर के मिलता है। अगर आप कटहल की वैज्ञानिक तरीके से खेती करते हैं तो लगभग एक पौधे से 5 से 7 हजार की कमाई बेहद आसानी से कर सकते हैं। इसके पौधे के लिए पानी की उचित व्यवस्था होना बेहद जरूरी है क्योंकि इसकी खेती ज्यादातर उच्च तापमान में ही होती है जिसके कारण इसके लिए पानी की काफी ज्यादा आवश्यकता रहती है।

कटहल की सबसे उत्तम क़िस्में

Jackfruit की farming सबसे ज्यादा अच्छी किस्म पर निर्भर करती है। अगर आप कटहल की उन्नत किस्मों के साथ इसकी खेती करेंगे तो आपको शत प्रतिशत फायदा मिलेगा। हालांकि बाज़ार में कटहल की कई किस्में मौजूद हैं लेकिन उनमें से जो सबसे उत्तम हैं वो हमनें इस आर्टिकल में आपके साथ शेयर की है।

1.खजवा

Vikaspedia के अनुसार व मार्किट में लोगों की रुचि आजकल खजवा की तरफ है। यह कटहल की वैज्ञानिक खेती के लिए सबसे उत्तम किस्म मानी गई है। इसका फल आकार में काफी बड़ा होता है तथा सबस जल्दी तैयार होने वाली किस्म है। इसमें ज्यादा रोगों का प्रकोप भी नहीं है जिसकी वजह से यह जल्दी मार्किट में पहुंच जाती है। इस समय मार्किट में काफी कम कटहल ही मौजूद होता है जिससे लोगों को काफी अच्छा रेट मिलता है। खजवा की स्टोरेज क्षमता भी काफी ज्यादा है तो इसके जल्दी खराब होने का डर भी नहीं रहता है। वहीं इस किस्म के कटहल के पौधे में फल अन्य किस्मों की तुलना में काफी ज्यादा लगते हैं। कटहल की इस किस्म के पौधे की ऊंचाई लगभग 7 मीटर तक जाती है मोटाई करीब 90 सेंटीमीटर से भी अधिक जाती है। खजवा के एक पेड़ से करीब 50 से 60 किलो तक का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

2. स्वर्ण मनोहर

ये कटहल की सबसे ज्यादा लगाई जाने वाली किस्म है क्योंकि इसमें उत्पादन भले ही अन्य किस्मों की तुलना में कम होता है लेकिन इसका पौधा काफी जल्दी तैयार होता है। वहीं इसकी ऊंचाई मात्र 6 मीटर तक रहती है लेकिन फिर भी इसका उत्पादन करीब 45 से 50 किलो तक रहता है। इसके साथ ही इसका फल लगने के करीब 30 दिनों के अंदर ही पूरी तरह से तैयार हो जाता है। वहीं इसका फल का वजन भी 15 से 20 किलो तक रहता है। इस किस्म के एक ही पौधे से करीब 250 से 300 किलो तक का उत्पादन मिलता है जिसके कारण इसे पूरे भारत में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इसको ज्यादातर नागपुर व उसके आसपास के क्षेत्रों में उगाया जाता है। इस किस्म को आप कच्चा भी बेच सकते हैं क्योंकि ये लगने के 5 से 15 दिनों के बीच बिकने के लिए तैयार हो जाता है।

3.स्वर्ण पूर्ति

कटहल फार्मिंग के लिए ये किस्म काफी अच्छी है क्योंकि कटहल की सब्ज़ी के लिए इसे सबसे उत्तम किस्म माना गया है। इस किस्म पर रांची के बागवानी एवं कृषि वानिकी विभाग ने शोध किया है। जानकारी के अनुसार इसकी ऊंचाई लगभग 5 से साढ़े पांच मीटर तक जाती है तथा मोटाई करीब 80 सेंटीमीटर तक रहती है। इस किस्म में फल बेहद देरी से पकते हैं जिसके कारण इसका प्रयोग सब्ज़ी के रूप में किया जाता है। इसका एक फल का वजन मात्र 10 किलो तक या इससे भी कम रहता है तथा सब्ज़ी के रूप में कटहल की सबसे पसंदीदा किस्म यही है। वहीं इसका फल ज्यादा मीठा भी नहीं होता है। अगर आप कटहल की फार्मिंग सिर्फ सब्ज़ी बेचने के लिए करना चाहते हैं तो ये किस्म आपके लिए एकदम बेस्ट है।

4. सिंगापुरी

कटहल की ये किस्म सबसे मीठी किस्मों में से एक है। इसका पौधा लगभग 6 से 7 साल के अंदर फल देने लगता है। इसका एक साल का उत्पादन करीब 250 किलो तक जाता है वहीं इसके एक फल का वजह करीब 10 से 15 किलो रहता है। ये देखने मे बेहद पिला होता है तथा इसके अंदर का गुदा भी काफी मीठा होता है। अगर आप कटहल को सब्ज़ी की बजाय फल के रूप में बेचना चाहते हैं तो ये किस्म की तरफ आपको एकबार जरूर देखना चाहिए। लेकिन इसका एक नेगेटिव पॉइंट ये है कि इसमें फल काफी देरी से लगते हैं तो अगर आप कटहल की वैज्ञानिक खेती की नजर से इसे लगाना चाहते हैं तो ये मेरे हिसाब से उतनी ज्यादा अच्छी नहीं है।

तो दोस्तों ये थी कटहल की कुछ उन्नत क़िस्में जिनकी तरफ आपको जरूर देखना चाहिए अगर आप कटहल की खेती करने की सोच रहे हैं। हालांकि बाज़ार में आपको कटहल की ढेरों क़िस्में मिल जाएगी लेकिन उन सभी का मकसद सिर्फ और सिर्फ आपसे पैसे ऐंठना है इसलिए किसी नई या अन्य हाइब्रिड किस्म की तरफ न जाएं। इन 4 किस्मों के अलावा भी बाज़ार में कुछ बढ़िया क़िस्में हैं जोकि इस प्रकार हैं – रुद्राक्षी, NJ-1, NJ-2, NJ-15 व NJ-3

कटहल का पौधा कैसे लगाएं (Kathal Kaise Lagaye)

अगर कटहल की वैज्ञानिक खेती करना चाहते हैं तो आपको ये पता जरूर होना चाहिए कि इसका पौधा प्रसारण कैसे करते हैं। कटहल का पौधा लगाने से पहले आपको अपने खेत में करीब 10 टन प्रति एकड़ से गोबर मिलाना होगा। उसके बाद आपको लगभग 4 बार खेत की अच्छी तरह से जुताई करनी है। ये मेहनत आपको सिर्फ शुरआत में ही करनी है क्योंकि इसका पौधा फिर कई सालों तक फल देता है। जब जुताई अच्छी तरह से हो जाये फिर आपको जमीन को समतल कर देना है। अब आपको पौधे से पौधे की दूरी 10 मीटर रखनी है तथा प्रत्येक गड्ढे की चौड़ाई व गहराई लगभग 1 मीटर तक रखनी है। अब आपको उन गड्ढों को करीब 1 महीने के लिए खुला धूप में छोड़ देना है ताकि उसके अंदर के सारे परजीवी नष्ट हो जाये। उसके बाद आपको इन गड्ढों में करीब 20-20 किलो गोबर डाल देना है तथा फिर इन्हें अच्छी तरह से मिट्टी से बंद कर देना है। अब लगभग 15 दिनों बाद आप इसमें कटहल का पौधा प्रसारण कर सकते हैं।

कटहल के पेड़ तैयार करने की निम्नलिखित विधियां

दोस्तों जब बात वैज्ञानिक खेती की आती है तब पौधा तैयार करना काफी जटिल लगता है। क्योंकि वैज्ञानिक ऐसी-ऐसी विधि से पौधा तैयार करते हैं कि आपको लगेगा कि कोई आम व्यक्ति ऐसा नहीं कर सकता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है तथा आप कई प्रकार से इसके लिए पौधा रेडी कर सकते हैं। आईये जानते हैं –

1.    ग्राफ्टिंग विधि: कटहल की वैज्ञानिक खेती करने के लिए ये विधि सबसे प्रचलित विधि है। इस विधि में सबसे पहले एक विकसित कटहल की शाखा को काट दिया जाता है। उसके बाद उस शाखा का कटा हुआ सिरा अच्छी तरह से तेज़ किया जाता है (V की शेप में)। फिर उसके बाद उस शाखा को एक छोटे कटहल के पौधे पर ग्राफ्ट किया जाता है और इसे ही ग्राफ्टिंग विधि कहते हैं। इस तरह से कटहल का पौधा जल्दी फल देता है तथा उससे जो औसतन फल की क्षमता में भी वृद्धि हो जाती है। इन विधि को कलम लगाना भी कहते हैं जिसमें इसके चारों और चिकनी मिट्टी या प्लास्टिक लगाया जाता है ताकि उसमें हवा न लग सकें। हालांकि जब एक बार वो ग्राफ्टिंफ विकसित हो जाती है उसके बाद उस प्लास्टिक को हटा दिया जाता है। अगर आप कटहल के पेड़ से जल्दी मुनाफ़ा कमाना चाहते हैं तो ये विधि काफी प्रभावकारी हो सकती है।

2.    बीज से पौधा तैयार करना: कटहल की इस विधि में काफी मेहनत की आवश्यकता पड़ती है। इसमें सबसे पहले आपको किसी पक्के हुए कटहल से या फिर मार्किट से अपनी किस्म के अनुसार बीज खरीद लेने हैं। अब आपको ये बीज काली प्लास्टिक की थैलियों में लगा लेने हैं। थैली के अंदर आपको 30% बालू, 30% मिट्टी, 20% गोबर तथा 10% कॉकपिट व अन्य खाद्य जैसे पोटाश डाल देनी है। अब बीज लगाने के बाद आपको इसमें हफ्ते में करीब 2 बार पानी देना है। ज्यादा पानी न दें क्योंकि इससे बीजों के सड़ने का डर रहता है। लगभग 8 से 10 महीनों के अंदर आपको कटहल का छोटा पौधा मिल जाएगा जिसे आप ग्राफ्ट भी कर सकते हैं। इसके साथ ही आप किसी अच्छी नर्सरी से भी कटहल के पौधे काफी ज्यादा Quantity में ले सकते हैं। लेकिन हमेशा स्वस्थ व उत्तम किस्म के पौधे ही लें।

 

कटहल का पौधा रोपणरोपाई व देखभाल

कटहल के पौधे की रोपाई सबसे बढ़िया वर्षा में रहती है क्योंकि उससे काफी समय तक नमीं रहने की संभावना रहती है। शुरुआती चरण में कटहल के पौधे को काफी नमीं की आवश्यकता होती है ताकि वो जल्दी-जल्दी बड़ें। कटहल के पौधे जून-जुलाई में लगाये जाते हैं लेकिन कुछ लोग इसे मार्च-अप्रैल के दौरान भी लगाते हैं। कटहल के नए पौधे को लगभग 3 साल तक अच्छे से इसकी कटाई-छंटाई करनी चाहिए।

कटहल की सिंचाई का तरीका

कटहल लगाने के बाद लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि इसकी सिंचाई किस तरह से करनी चाहिए। क्योंकि कुछ लोग इसे या तो बेहद कम पानी दे देते हैं जिससे यह पिला होके सुख जाता है तो वहीं कुछ लोग ज्यादा पानी डाल देते हैं। इसकी वजह से भी इसका पौधा सड़ जाता है तो आपको बता दें कि अगर आप कटहल खेती करते हैं तो इसे 5 से 7 दिनों में अच्छी तरह से पानी दें। यदि वर्षा मौसम रहता है तो इसे पानी बिल्कुल न दें क्योंकि इसकी जड़ें पानी के प्रति काफी नाजुक होती है। कटहल के एक सामान्य पौधे को महीने में मात्र 5 से 6 बार ही पानी दें जिससे उसकी अच्छी वृद्धि होगी।

कटहल के पौधे में उर्वरकखाद व खरपतवार का नियंत्रण

कटहल का पौधा हर वर्ष Same Quantity में फल देता है इसलिए आपको इसकी खाद का भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है। लगभग 1 पौधे को 30 किलोग्राम तक गोबर दें इससे नमीं भी बनीं रहेगी तथा सिंचाई की आवश्यकता भी कम पड़ेगी। इसके साथ ही कटहल के प्रत्येक पौधे में लगभग 100gm यूरिया, 200gm सुपर फास्फेट तथा 100gm पोटाश डालें। इस मात्रा को आप पौधे की वृद्धि के साथ बड़ा भी सकते हैं। लेकिन खाद देते समय एक बात का ध्यान अवश्य रखें कि तने से करीब 2 मीटर की दूरी पर ही खाद डालें। अगर आप डायरेक्ट तने के साथ चिपका के खाद डालते हैं तो इससे पौधे के गलने व सूखने की संभावना रहती है। खाद डालने के बाद उसे ऊपर से गोबर से ढक दें ताकि अच्छी तरह से कटहल के पौधे को खाद लग सकें।

वहीं इसके साथ-साथ ही इनमें खरपतवार का नियंत्रण करना भी बेहद जरूरी है। 15 दिनों के अंतराल के बाद इसमें से खरपतवार जरूर निकालें तथा जब पौधे बड़े हो जाते हैं तब आप कटहल के पौधे की छाया में अन्य खेती जैसे :- हल्दी, अदरक व काली मिर्च जैसी खेती कर सकते हैं। इस प्रकार आप एक ही जमीन से दो-दो खेती करके अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

कटहल के पौधे में पुष्पन व फलन

कटहल का पौधा ”मोनोसियस” होता है जिसका अर्थ होता है कि नर-मादा फूल लगते तो एक ही वृक्ष पर हैं लेकिन दोनों अलग-अलग स्थानों पर लगते हैं। कटहल के नर फूल की पहचान आप इससे कर सकते हो कि वह मादा फूल की तुलना में ज्यादा चिकना होता है। नर फूल सामान्यतः नवंबर से दिसंबर के बीच आते हैं तथा जल्दी ही गिर जाते हैं। वहीं मादा फूल जोकि फल देने वाले फूल होते हैं वो जनवरी-फरवरी में आते हैं। मादा फूल गुच्छों में आते हैं जिसमें कुछ फूल नर के भी होते हैं और इसी प्रकार कटहल का परागण होता है। अगर फूल के गुच्छों की संख्या कम होती है तो प्रोडक्शन भी थोड़ा कम होगा। इसका फल करीब जून-जुलाई में पूरी तरह मार्किट के लिए तैयार हो जाता है।

कटहल की परिपक्वता

कटहल के पौधे देखने में कच्चे से लेकर पकने तक लगभग एक जैसे ही रहते हैं जिसकी वजह से कई लोगों को इसकी तुड़ाई का सही समय पता नहीं होता है। वैसे तो कटहल की तुड़ाई उसकी किस्मों पर भी निर्भर करती है। उदहारण के लिए अगर आपने खजवा वैरायटी लगाई है तो वो सबसे जल्दी तैयार होने वाली वैरायटी है जो लगभग 100 दिनों के अंदर-अंदर ही तोड़ने लायक हो जाती है। परन्तु कटहल की परिपक्वता जानने का एक देसी तरीका है जोकि हम आपके साथ शेयर करने वाले हैं।

दरअसल जब कटहल के फल के ऊपर कांटे थोड़े कम नुकीले होने लगते हैं तो आप समझ लें कि कटहल की खेती तैयार हो चुकी है। इसके साथ ही अगर आप कटहल के कच्चे फल पर अपने हाथ से आराम से वार करते हैं तो उसके अंदर टक-टक की आवाज़ आती है। वहीं अगर आप पक्के हुए कटहल के फल पर वार करते हो तो उसके अंदर से धब-धब की साउंड आती है। कटहल के फल तोड़ते वक़्त हमेशा सावधानी बरतें क्योंकि अगर आप hnchayi से कटहल का फल गिराते हैं तो वह फट जाएगा जिसका मार्किट में कुछ भी भाव नहीं होगा। इसलिए किसी जुगाड़ या छड़ी के साथ ही फल को तोड़ें व सावधानीपूर्वक मार्किट में ले जाएं। कटहल के एक सामान्य पेड़ से लगभग 50 किलो से ऊपर का माल निकलता है। कटहल का पौधा लगभग 15 सालों बाद पूर्ण रूप से विकसित हो जाता है जिसके बाद यह 250 से 300 किलो तक फल आराम से दे देता है।

कटहल में रोग व कीट नियंत्रण

कटहल के पौधे में शुरआत में रोग ज्यादा लगते हैं लेकिन अगर एक बार पौधा बड़ा हो गया तो उतने ज्यादा रोग इसमें नहीं आते हैं। कटहल की खेती में लगने वाले रोग निम्नलिखित हैं :-

1.    फल का सड़ना: सबसे ज्यादा देखे जाने वाला रोग यही है जिसमें कटहल के फल पेड़ में ही सड़ने लगते हैं। यह रोग फल के डंठल के साथ शुरू होता है तथा धीरे धीरे करीब 5 से 10 दिनों में पूरे फल को खराब कर देता है। लेकिन समय रहतें अगर इसमें ब्लू कॉपर जिसे नीला थोथा कहते हैं उसका छिड़काव किया जाए तो ये समस्या खत्म हो जाती है।

2.    धब्बा लगना: दूसरा जो रोग कटहल की फार्मिंग करते वक्त आता है वो है गुलाबी रंग का धब्बा। इस रोग के दौरान पौधे की पत्तियां में गुलाबी धब्बा लग जाता है जो पौधे की पूरी Growth को रोक देता है। यही नहीं इससे पौधा वहीं पर मरने लगता है। इससे बचाव के लिए 3 दिन के अंतराल में ब्लू कॉपर का छिड़काव जरूर करें।

3.    पत्तियों का पीला होना: कटहल की वैज्ञानिक खेती में पत्तियों का पीला होना आम बात है लेकिन अगर समय रहते इसकी देखभाल न की जाए तो काफी दिक्कत हो सकती है। इस रोग के दौरान पूरे पेड़ की पत्तियां नीचे गिरने लगती है तथा पौधा बढ़ना बन्द हो जाता है। इस रोग के लिए आप 5ml मैलाथियान का छिड़काव कर सकते हैं। इसे लगभग 5 दिनों के अंतराल बाद करें। इसके साथ ही ज्यादा पानी देने की वजह से भी ये समस्या आ सकती है तो पानी की मात्रा हमेशा सही रखें।

4.    तना छेदक: ये कटहल के पौधे में लगने वाली सबसे कॉमन समस्या है। इस दौरान पौधे के तने में सुराख जैसे होने लगते हैं तथा फिर पौधा वहां से नाजुक होकर टूट जाता है। समय रहते अगर इसका रोकथाम न किया जाए तो यह आपकी पूरी कटहल की फसल को नष्ट कर सकता है। इसके लिए आप उस छेद में रुईं में पेट्रोल लगा कर छोड़ दें इसको गन्ध से वो कीड़ा मर जाता है। इसके साथ ही आप नुवाक्रान के छिड़काव से भी इस रोग को भगा सकते हैं।

 
कटहल से होने वाला मुनाफ़ा

कटहल की फसल से लाभ लेना बेहद आसान है। आपको सबसे पहले 150 पौधे प्रति हेक्टेयर की दर से लगा लेने हैं। लगभग 5 से 6 सालों के अंदर इसमें फल आने लगते हैं। एक पेड़ से आप शुरआत में करीब 60 से 70 किलो तक उत्पादन ले सकते हैं। इस तरह सिर्फ एक पेड़ से आपकी कमाई 6 से 8 हजार तक रहती है। यह कमाई आपकी हर साल बढ़ेगी क्योंकि पेड़ का आकार व उसके फल देने की क्षमता भी बढ़ती है। इस तरह से आप 1 हेक्टेयर से करीब 8 से 10 लाख रुपये शुरआत में कमा सकते हैं। जिसमें से 2 से 3 लाख आपका खर्चा आ सकता है। यही नहीं जब पेड़ लगभग 10 साल का हो जाएगा तो यह मुनाफ़ा दोगुना हो जाएगा। एक पूर्ण कटहल के पौधे से आप 400KG तक का उत्पादन ले सकते हैं तो आप सोच सकते हैं कि इसकी खेती करने में कितना फायदा है।

अगर आपको कटहल की खेती कैसे करें? कटहल का पौधा कैसे लगाएं तथा कटहल से सम्बंधित संपूर्ण जानकारी अच्छी लगी हो तो कमेंट जरूर करें। इसके साथ हो ऐसी ही खेती से सम्बंधित जानकारी के लिए हमें फॉलो जरूर करें।

FAQs About Kathal Ki Kheti 2022

कटहल का पेड़ कितने दिन में फल देता है?

कटहल का पौधा लगाने के बाद यह आपको करीब 4 से 5 साल के अंदर फल देने लगता है। लेकिन अगर आपका पौधा किसी बेकार वैरायटी का है तो यह लगभग 7 साल या इससे अधिक समय बाद फल देगा। वहीं कटहल में फूल लगने के बाद करीब 100 से 120 दिनों में इसका फल परिपक्व हो जाता है।

कटहल कितने प्रकार के होते हैं?

कटहल की बाजार में हजारों क़िस्में उपलब्ध हैं। लेकिन खजवा, सिंगापुरी, रुद्राक्षी व गुलाबी सबसे बढ़िया क़िस्में है। इनका फल सामान्यतः 100-120 दिनों में पूरा पक कर तैयार हो जाता है।

कटहल का पेड़ सूख रहा है क्या करें?

अगर आपका कटहल का पेड़ सुख रहा है तो सबसे पहले उसके तनें को देखें। अगर उसमें छेद हैं तो आपका पेड़ तना छेदक से ग्रसित हो चुका है। ऐसे में नुवाक्रान या पेट्रोल को रुईं में लगाएं तथा उसी छेद में डाल दें। उसके बाद आप उसे चिकनी मिट्टी से बंद कर दें। इससे आपका तना छेदक कीड़ा मर जायेगा तथा धीरे-धीरे आपका पौधा फिर से हरा-भरा हो जाएगा।

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